जब एक गरीब मछुआरे की मिला सोने का उपहार।

एक बार एक गांव में एक गरीब मछुआरा रामनाथ अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह रोज़ाना गांव की नदी में जाल डालकर मछली पकड़ता था। जो भी मछली मिलती उसे बाज़ार में बेचता जिससे उसके घर की रोज़ी रोटी चलती थी।

एक दिन की बात है, रोज़ की तरह वह अपना जाल लेकर नदी के किनारे गया और मछली पकड़ने के लिए नदी में जाल डाला थोड़ी देर बाद उसके जाल में न जाने ऐसा क्या फंसा जिसको वापस खींचते समय उसका जल टूट गया। मछुआरे बहुत दुःखी हुआ परंतु उसने हार नहीं मानी। उसने एक धागे से मछली पकड़ने का कांटा बनाया। और फिर से मछली पकड़ने चला गया।

उसके बहुत प्रयास करने के बाद एक भी मछली उसे आज न मिली। वहीं उसी गांव का एक और मछुआरा अपने घड़े में ढेर सारी मछली लेकर वहां से निकला और उससे बोला “आज तुम्हारा जाल कहा है जो कांटे से मछली पकड़ रहे हो। ऐसे तो तुमको एक भी मछली समय पर न मिल पाएगी और बाजार भी बंद हो जाएगी।” इतना सुनते ही रामनाथ निराश हो गया। फिर उसने सोचा कि इतनी देर हो गयी है मुझे मछली पकड़ते एक भी मछली आज नहीं मिली ऐसा न हो कि बाजार भी बंद हो जाये। आज मैं बाजार में किसी से उधार मांगकर खाना घर ले जाता हूँ जब मेरे पास मछली आएगी तो उसे बेचकर उधार चुका दूंगा।

वह बाजार जाता है और एक सब्ज़ी वाले से बची हुई खराब सब्ज़ी उधार ले लेता है और घर चला जाता है। घर जाकर वह अपनी पत्नी को सब्ज़ी का थैला देता है। उसकी पत्नी जैसे उन खराब सब्ज़ियों को देखती है। तो उसपर खूब बिगड़ती है और उसको ताने मारने लगती है। कि शादी के समय तो तुमने मुझसे बहुत सारे वादे किए थे और आज तुम मुझे ठीक से अच्छा खाना भी नहीं खिला रहे हो कहां गए तुम्हारे वह वादे। अगर कल भी मुझे तुमने ऐसा सड़ा हुआ खाना खिलाया तो मैं यहां तुम्हारे पास नहीं रहूंगी मैं अपने मायके चली जाऊंगी।

मछुआरा उदास हो गया और भगवान से कहने लगा कि हे भगवान आज तो मेरी पत्नी भी मुझे छोड़कर जाने की बात कह रही है। मेरे इतने प्रयास के बाद भी मुझे निराश ही हाथ लगी अब आप ही मुझ गरीब पर कृपा करो।

मछुआरा अगले दिन फिर से अपना कांटा लेकर नदी किनारे एक बार फिर से मछली पकड़ने का प्रयास करता है। कुछ समय बाद उसके कांटे में एक मछली फसती है। वह बहुत खुश हो जाता है वह मछली बाकी दिन की मछलियों से ज्यादा बड़ी होती है। वह उस मछली को देखकर बहुत खुश होता है। और भगवान को धन्यवाद देता है। और सोचता है कि आज इस मछली को बेचकर उसे बहुत धन मिलेगा और उससे घर में अच्छा खाना बनेगा।

लेकिन इतने में एक वृद्ध महिला वह आती है और मछुआरे के सामने रोने लगती है और कहती है कि बेटा मैंने बहुत दिनों से कुछ नहीं खाया है तुम मुझे यह मछली दे दो नहीं तो मेरे प्राण निकल जाएंगे। रामनाथ उस महिला से कहता है कि माताजी अगर आज मैं ये मछली नही लेकर गया तो मेरे घर में भी कुछ खाना नही बन पाएगा। लेकिन वह वृद्ध महिला उसके सामने रोने लगती है फिर रामनाथ को दया आ जाती है वह अपनी परवाह किये बिना उस वृद्ध महिला को वह मछली दे देता है।

उस बूढ़ी माता ने रामनाथ को एक पौधा दिया और कहा कि इस पौधे को अपने घर के आंगन में लगाना इसमें बहुत मीठे फल लगेंगे। रामनाथ उस पौधे को लेकर घर जाता है। उसकी पत्नी जब उसे बिना खाना लाये देखती है, तो आज फिर उसे ताने मरती है और अगले दिन अपने मायके चली जाने को कहती है।

रामनाथ निराश हो जाता है और उस पौधे को अपने घर के आंगन में लगाने लगता है। आज वह और उसकी पत्नी बिना भोजन किये ही रात को सो जाते हैं। अगले दिन जब रामनाथ सुबह उठता है और आपने आंगन में जाता है तो क्या देखता है कि वह पौधा जो उसने कल लगाया था वह अब बडा हो गया है और वह सोने का हो गया है।

वह अपनी पत्नी को बुलाता है और दिखाता है। दोनों बहुत खुश हो जाते हैं और उस वृद्ध दादी की जय करने लगते है।

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